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Poetry: ओ माईआह by Vishwajeet Ranade


मैं बर्मा में था जब वो बातें हुई.

जब पहले पल तुमसे मुलाकातें हुई.

उस रंगून की पहरेदारी में मैं...

पहरेदार हुआ, करता था तेरा...

उन तोपों की आवाजों ने मगर.

जान बख्शी मेरी खामखा भी अगर...

तो आऊंगा तेरे ही पास मैं...

या आएगी चिट्ठी, लेकर कुछ खबर...

सपनों में तेरे हर दिन और रात है...

नींद आती नहीं, कैसे हालात है...

तु यांगोन की मीठी, हंसती लहर...

तेरे सपनों में शायद, मेरा हाथ है...

कुछ घायल सा हूं, मैं भी आजकल.

ना दिखती है तू गश्त पर अगल-बगल.

तेरी खिडकी भी बंद है, ओ माईआह.

मेरे बर्मा में बचे है, चंद ही पल.

कल को लौटूंगा मैं हिंदोसतां, तू भी चल...

या रोक ले मुझको जाने से घर.

एक चिट्ठी ही तो बननी है तेरे वासते...

तुझसे टूटने का ही तो लगता है डर...

तेरा नाम क्या है, ओ हमसफर...

चलो जाने भी दो अब क्या है खबर...

मैं देखूंगा राह तेरी रात दिन.

तुझे कहां है वैसे भी मेरी खबर...

मैं बर्मा में था जब वो बातें हुई.

जब पहले पल तुमसे मुलाकातें हुई.

उस रंगून की पहरेदारी में मैं...

पहरेदार हुआ, करता था तेरा...

VISHWA is funny,ludicrous, techie, singer, poet.


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